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अंग्रेजों के समय का कानून बदलना जरूरी- हितानंद*

वर्षों पुराने अंग्रेजी कानून की जगह लेंगे नए कानून जिसमें दंड के स्थान पर न्याय घर को दी जाएगी प्राथमिकता। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 लागू होने के अवसर पर बालको नगर थाने में थाना प्रभारी अभिनव सिंग जी के सफल नेतृत्व में जागरूकता संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में समाज के प्रबुद्ध जनों, राजनीति से जुड़े लोगों एवं आम नागरिकों को आमंत्रित किया गया। नए भारत का नया कानून कार्यक्रम के दौरान नए कानूनो के बारे में पुलिस अधिकारियों द्वारा उपस्थित नागरिकों को जानकारी प्रदान की गई। उक्त कार्यक्रम के दौरान नेता प्रतिपक्ष हितानंद अग्रवाल ने कहा कि भारत तो आजाद हो गया लेकिन भारत के नागरिकों को आज भी अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही कानून व्यवस्था झेलनी पड़ रही है जिसमें सुधार की अत्यंत आवश्यकता है। आज यह पहल की गई है जो की प्रशंसनीय है। आपको बता दें कि

1. न्याय के लिए समग्र दृष्टिकोण केवल अपराधी ही नहीं बल्कि पीड़ित एवं समाज के लिए न्याय सुनीश्चित करना।

2.आधुनिक जांच प्रक्रिया में तकनीक का प्रयोग करके जांच को और तेज और कुशल बनाना l

3.आतंकवाद एवं संगठित अपराध से निपटना l

4.गंभीर अपराध के लिए बढ़ी हुई सजा, जुर्मना एवं न्युनतम दंड का प्रावधान l

5.भीड-हिंसा, साइबर- क्राइम, स्नैचिंग जैसे नए एवं अन्य उभरते अपराध के लिए प्रवाधानो का होना l

6.दण्ड प्रक्रिया संहिता को अधिक सुव्यस्थित, सुगम एवं प्रवर्तनिय बनाना l

7. आधुनिक भारत हेतु न्याय-केंद्रित कानून जहां महिलाओं-बच्चों एवं कामजोर वर्ग को प्रथमिकता दी गई है l

उक्त कार्यक्रम के दौरान बालको के अधिकारी अरुण बिस्वाल, सुमंथ सिंह, हीरामनी शर्मा, पार्षद तरुण राठौर, पार्षद पति नारायण सिंह राजपूत, पार्षद बद्रीकीरण, विकास डालमिया, दुष्यंत शर्मा, जोशी जी, एफ डी मानिकपुरी, मांजी , रवि भाई , पवन यादव, शशि चंद्रा एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

 
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