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डिनर के नाम पर धोखा ! गेस्ट की गाड़ी तुड़वाई, झूठ बोला, फिर मुकरा होटल — उपभोक्ता आयोग ने फोर सीजन की अकड़ की चूर-चूर की

कोरबा। शहर में खुद को बड़ा और नामी बताने वाला फोर सीजन द रेस्टोरेंट अब कानून के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। डिनर पर आए गेस्ट से पहले सुरक्षा का भरोसा, फिर गाड़ी का नुकसान और उसके बाद जिम्मेदारी से भागने की बेशर्मी — इस पूरे मामले ने होटल प्रबंधन की असलियत उजागर कर दी है।

यह मामला सिर्फ एक वाहन क्षति का नहीं, बल्कि होटल इंडस्ट्री में बढ़ती मनमानी और उपभोक्ताओं के भरोसे के साथ खुले खेल का जीता-जागता उदाहरण है।

“गाड़ी सुरक्षित है” — झूठा भरोसा, टूटी हेडलाइट

नरसिंग गंगा कॉलोनी, न्यू पोड़ीबहार निवासी एवं अधिवक्ता हेमंत गौतम 5 अगस्त 2023 को अपने परिवार के साथ रात्रि भोजन के लिए फोर सीजन रेस्टोरेंट पहुंचे थे। होटल के सिक्योरिटी गार्ड ने पूरे भरोसे के साथ वाहन को रेस्टोरेंट के बगल स्थित खाली प्लॉट में पार्क कराया और कहा कि यहां गेस्ट की गाड़ियां सुरक्षित रहती हैं।

लेकिन डिनर के बाद जब वे बाहर निकले तो उनकी महिंद्रा बोलेरो नियो की ड्राइवर साइड हेडलाइट और पैनल पूरी तरह क्षतिग्रस्त पाए गए। यह नजारा किसी भी गेस्ट के लिए सदमे से कम नहीं था।

पहले माफी, फिर पलटी — होटल का दोहरा चरित्र

नुकसान की शिकायत करने पर होटल संचालक हिमांशु सिन्हा ने पहले माफी मांगी, सीसीटीवी कैमरे का हवाला दिया और वाहन मरम्मत का पूरा खर्च उठाने का वादा किया।

लेकिन कुछ ही दिनों में होटल प्रबंधन पलट गया। पहले टालमटोल, फिर कैमरे होने से इनकार और आखिरकार किसी भी तरह की मदद से साफ मना कर दिया गया। यानी पहले भरोसा, फिर झूठ और अंत में जिम्मेदारी से भागने की कोशिश।

आम ग्राहक होता तो दब जाता, वकील था तो होटल फंसा

अधिकतर मामलों में आम ग्राहक ऐसे नुकसान को चुपचाप सह लेता है, लेकिन इस बार सामने अधिवक्ता हेमंत गौतम थे। उन्होंने स्वयं के खर्च पर वाहन की मरम्मत कराई और फिर न्याय के लिए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का दरवाजा खटखटाया।

आयोग में फटी होटल की चालाकी

सुनवाई के दौरान होटल प्रबंधन की दलीलें टिक नहीं सकीं। आयोग ने साफ माना कि जब होटल स्वयं पार्किंग की व्यवस्था कराता है, तो वह उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।

आयोग की अध्यक्ष रंजना दत्ता एवं सदस्य पंकज कुमार देवड़ा ने होटल संचालक को आदेश दिया कि वह 30 दिनों के भीतर 10,000 रुपये क्षतिपूर्ति तथा 7,000 रुपये वाद व्यय का भुगतान करे। भुगतान न करने पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

आयोग का कड़ा संदेश

आयोग ने स्पष्ट कहा कि होटल द्वारा दी जाने वाली वैलिड पार्किंग सुविधा कोई एहसान नहीं, बल्कि मेहमानों का अधिकार और होटल की कानूनी जिम्मेदारी है।

❓ ग्राम यात्रा सवाल उठाती है

▪️ जब होटल खुद पार्किंग कराए, तो नुकसान की जिम्मेदारी से कैसे बच सकता है ?
▪️ क्या नामी होटल खुद को कानून से ऊपर समझ बैठे हैं ?
▪️ अगर एक अधिवक्ता को न्याय के लिए लड़ना पड़ा, तो आम ग्राहक का क्या होगा ?

फोर सीजन होटल पर आया यह फैसला उन सभी होटलों के लिए चेतावनी है, जो गेस्ट को सिर्फ बिल भरने वाली मशीन समझते हैं।

डिनर खत्म हुआ, लेकिन होटल की अकड़ कानून ने तोड़ दी।

 
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