विजयनगर में गोवर्धन पूजा: खौलते दूध से स्नान का नजारा देखने जुटी भीड़

रामचन्द्रपुर । छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के विजयनगर में इस वर्ष भी आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां बाकी नदी तट पर विराट गोवर्धन पूजा (कराह पूजन) का आयोजन किया गया।
काशी (बनारस) से आए गोविंद भगत यादव के सानिध्य में हुए इस आयोजन में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
पूजा कार्यक्रम की शुरुआत पूरी विधि-विधान से की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म और परंपरा के इस संगम का साक्षात्कार किया।
विजयनगर के धान खरीदी केंद्र के समीप बाकी नदी तट पर बने पूजा स्थल पर मिट्टी के घड़े में दूध भरकर गोबर के उपले से आग लगाई गई और उसी में दूध को खौलाया गया। इसके बाद गोविंद भगत यादव ने पूजा से जुड़ी कथा लोगों को सुनाई और परंपरा के अनुरूप खौलते दूध से स्नान कर चमत्कारिक अनुष्ठान प्रस्तुत किया, जिसे देखकर श्रद्धालु अभिभूत हो उठे।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए गोविंद भगत यादव ने बताया कि गोवर्धन पूजा द्वापर, त्रेता, सतयुग और कलियुग चारों युगों में मानव कल्याण के लिए की जाती रही है। उन्होंने कहा इस पूजन से पशु-पक्षियों सहित समस्त जीव-जंतुओं को शांति और कल्याण की प्राप्ति होती है।
जिन लोगों के जीवन में ग्रह बाधा या मानसिक अशांति होती है, वे इस पूजा के आयोजन से राहत प्राप्त कर सकते हैं। समापन में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर सभी जीवों के कल्याण और प्रदेश की समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों सहित आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
पुरातन काल से चली आ रही है परंपरा उत्तरप्रदेश के काशी से यहां हर साल कराह पूजा संपन्न कराने पहुंचने वाले पुजारी गोविंद भगत यादव ने बताया कि पुरातन काल से कराह पूजन की परंपरा चली आ रही है।
यह यादव वंश का वंशज पूजन है। इस पूजा से जगत का कल्याण होता है, पशु-पक्षी, जीव-जंतु सभी को शांति मिलती है, प्राणियों को सुख-समृद्धि मिलती है। ग्रह बाधा से ग्रस्त लोगों की परेशानी दूर होती है।
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