‘कांग्रेस को टीएमसी में शामिल हो जाना चाहिए’, 5 राज्यों में करारी हार पर मिला प्रस्ताव
नई दिल्ली. चार राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की जीत और पांच राज्यों में कांग्रेस की हार के बाद तृणमूल कांग्रेस एक बार फिर हमलावर हो गई है. पार्टी के नेताओं ने कांग्रेस को टीएमसी में शामिल होने की सलाह दी है. हालांकि, कांग्रेस ने टीएमसी पर भारतीय जनता पार्टी का ‘एजेंट’ होने के आरोप लगाए. भाजपा ने भी गोवा चुनाव के नतीजों को लेकर टीएमसी पर निशाना साधा. खास बात है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी चुनावी प्रदर्शनों को लेकर कांग्रेस पर निशाना साध रही है.
टीएमसी नेता और प्रदेश सरकार में मंत्री फिरहाद हाकिम ने कहा, ‘मुझे समझ नहीं आता कि कैसे कांग्रेस जैसी एक पुरानी पार्टी नदारद होती जा रही है. हम भी इस पार्टी का हिस्सा थे. कांग्रेस को टीएमसी में शामिल हो जाना चाहिए. यह सही समय है. इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस के सिद्धांतों को लेकर हम गोडसे के सिद्धांतों के खिलाफ लड़ सकते हैं.’
टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने भी कहा, ‘हम काफी समय से कह रहे हैं कि भाजपा जैसी ताकत से कांग्रेस नहीं लड़ सकती. भाजपा के खिलाफ लड़ने के लिए हमें ममता बनर्जी जैसे नेता की जरूरत है. कांग्रेस यह समझना चाहिए.’ इससे पहले टीएमसी के मुखपत्र ‘जागो बांग्ला’ में भी कई बार कांग्रेस पर आरोप लगते रहे हैं कि पार्टी ‘भाजपा के खिलाफ विपक्ष का ताकतवर गठबंधन बनाने के बजाए ट्विटर पर सिमट गई है.’
गोवा में टीएमसी को चोट
गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री लुईजिन्हो फलेरियो को पार्टी में शामिल कर कांग्रेस को चोट पहुंचाई थी. हालांकि, राज्य में टीएमसी का प्रदर्शन काफी खराब रहा और एक भी सीट नहीं जीत सकी. जबकि, टीएमसी की गठबंधन पार्टी महाराष्ट्र गोमांतक पार्टी ने दो सीटें जीती हैं. हालांकि, एमजीपी ने कहा है कि वे भाजपा का समर्थन करेंगे.
कांग्रेस का निशाना
बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने टीएमसी के प्रस्ताव पर कहा, ‘टीएमसी, भाजपा की सबसे बड़ी एजेंट है. अगर वे भाजपा के खिलाफ लड़ने को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए.’
बंगाल भाजपा के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा, ‘अगले लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी हमारा प्रधानमंत्री चेहरा होंगे. गुरुवार के विधानसभा चुनाव के नतीजों से यह साफ है कि पश्चिम बंगाल के बाहर कोई टीएमसी नहीं है. वहीं, अरविंद केजरीवाल की पार्टी पंजाब में भी सरकार बनाएगी. परिणामस्वरूप, अब उन्हें तय करना चाहिए कि विपक्ष का चेहरा कौन होगा, ममता या केजरीवाल?’ (news18.com)
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