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प्रदेश में बिजली कटौती पर अब राज्य विद्युत नियामक आयोग रखेगी नजर

गैरजरूरी या सीमा से अधिक बिजली कटौती पर पॉवर कंपनी पर कार्रवाई, नियम तैयार करने नियामक आयोग की जनसुनवाई

रायपुर। प्रदेश में बिजली कटौती पर अब राज्य विद्युत नियामक आयोग की नजर रहेगी। गैर जरूरी अथवा समय सीमा से अधिक कटौती पर आयोग राज्य पॉवर कंपनी के खिलाफ सीधे कार्रवाई करेगी। प्रदेश के शहरों और गांवों में बिजली कटौती की शिकायतें आम हंै। गांवों में तो कई बार घंटों तक बिजली गुल रहती है। राज्य पॉवर कंपनी लगातार बिजली कटौती की समस्या से निपटने के लिए कदम उठा रही है, लेकिन अब आयोग का भी दखल रहेगा।
उपभोक्ताओं को बिना किसी बाधा के बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में आयोग ने भी पहल की है और एक्ट में इसके लिए अधिकार भी दिए गए हैं। मगर, आयोग सिर्फ टैरिफ तय करने तक ही सीमित रहता था, लेकिन डीएस मिश्रा ने बिजली नियामक आयोग के अध्यक्ष का दायित्व संभालने के बाद पहली बार उपभोक्ताओं को बिजली की कटौती की समस्या से निपटने के लिए काम हो रहा है।
आयोग ने इसके लिए जन सुनवाई शुरू कर दी है। राज्य पॉवर कंपनियों के साथ आयोग की बैठकें हो रही है। दो बार सुनवाई भी हो चुकी है। आयोग, पॉवर कंपनी का पक्ष लेने के बाद समय सीमा भी तय करेगा। यानी अधिक या गैर जरूरी कटौती पर राज्य पॉवर कंपनी को जुर्माना देना पड़ सकता है। न्यूनतम बिजली कटौती का समय भी तय रहेगा। इस साल बिजली को लेकर शिकायतें कुछ ज्यादा ही आई है। इस पूरे मामले में लापरवाही बरतने पर पॉवर कंपनी ने करीब आधा दर्जन से अधिक अधिकारियों पर कार्रवाई भी की है।
हालांकि पॉवर कंपनी की तरफ से यह बताया गया कि पिछले साल की तुलना में इस साल कटौती में कमी आई है। कुछ जगह राजनीतिक कारणों से अफवाह भी फैलाने की चर्चा रही है। इन सबके बावजूद बिजली कटौती को लेकर विधानसभा में भी मामला उठा था। आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ज्यादातर जगहों पर ट्रांसफार्मर ओवर लोड हैं। इस व्यवस्था को ठीक करना जरूरी है। आयोग इसको लेकर पॉवर कंपनी से चर्चा कर रहा है। माना जा रहा है कि आयोग के हस्तक्षेप के बाद बिजली कटौती को लेकर जवाबदेही तय हो सकेगी और इस पर काफी हद तक अंकुश लग सकता है।

 
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